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Tuesday, October 18, 2011

अनजाना सा रिश्ता (part 6) (last part)

माहि के मोबाइल पे कुनाल का वो SMS पढ़ कर तो मेरे होश ही उड़ गए.....मैंने inbox में पिछले कुछ SMS भी पढ़े...हर SMS माहि की बेवफाई की चीख चीख कर गवाही दे रहा था....sent items में भी माहि ने कुनाल को कुछ ऐसे ही SMS भेजे हुए थे....पता नहीं यह कब से चल रहा था....कुनाल माहि का ex-boyfriend है यह तो माही ने मुझे पहले भी बताया था....पर आज भी वो दोनों.....

मुझे अपने कमरे में ही घुटन सी होने लगी.....सांस नहीं ली जा रही थी मुझसे...ताज़ी हवा खाने बाहर निकल गया....एक एक SMS को बार बार पढता रहा..पर एक बार भी उसका एक शब्द भी नहीं बदला.....होटल के lawn में जा कर मुझे सांस आई पर दिल और दिमाग अभी भी सुन्न ही था....
फिर माहि भी वहां मुझे ढूंढते हुए आ गयी....."पियूष...पियूष...तुम यहाँ क्या कर रहे हो...तुमने मेरा मोबाइल देखा.." इस से पहले वो कुछ और बोले मैंने उसे उसका मोबाइल थमा दिया...और जोर से बोला...."माहि मैं सारे SMS पढ़ लिए है.....तुम और कुनाल....आखिर क्या चल रहा है...यह सब मेरे होते हुए...मेरे साथ तुम ऐसा कैसे कर सकती हो" सारे सवाल एक साथ पूछ लिए.....

"पियूष....मुझे मत बताओ...जैसे तुम्हे कभी भी मुझ पर शक नहीं हुआ..तुमको जैसे कभी पता नहीं चला मेरे और कुनाल के बीच क्या है.....we are F**K buddies...just like you and Siya ....so just chill baby..." माहि का जवाब मेरा गुस्सा सातवे आसमान पे पहुचने के लिए काफी था...."यह क्या अनाप शनाप बोल रही हो...सिया और मैं बस दोस्त है.....अच्छे दोस्त....सिया एक अच्छी लड़की है उसके बारे तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो.." मुझे बीच में ही काटते हुए माहि एक बार बोली....."रहने दो..जैसे मैं नहीं जानती रात-रात भर एक लड़का और लड़की एक साथ कौन सी पढाई करते है...."
"सिया और मैं एक साथ पढाई ही करते थे....कई बार तो वो मेरे नोट्स बनती थी जब मैं तुमसे फ़ोन पे बात किया करता था..."

माहि ने फिर मेरी बात पूरी नहीं होने दी..."इसमें कौनसी बड़ी बात है...कई बार मैं भी कुनाल की बाँहों से ही तुमसे फ़ोन पे बात किया करती थी...और अगर सिया और तुम सच में रात भर पढ़ते थे तो तुमने कभी मुझे वो सुख क्यूँ नहीं दिया...तुमने नहीं दिया तो मैंने अपने ex-boyfriend से मांग लिया जो मेरी इस मांग का हमेशा ख्याल रखता था....."
"छी.....कितनी घटिया सोच है तुम्हारी...." मैंने कहना शुरू ही किया था....की सिया की आवाज़ कानो पे पड़ी...."माहि ये क्या बोले जा रही हो.....हम बस अच्छे दोस्त है.....एक साथ पढ़ते थे बस.....ऐसा कुछ नहीं जैसा तुम बोल रही हो....पियूष तुमको बहुत प्यार करता है..."

"चलो एक बार तुम्हारी बात मान भी लेते है पर जिस तरह से तुम एक दुसरे का ख्याल रखते हो...यह तुमको यहाँ ले आया क्यूंकि तुम्हारी दुःख की घडी में अकेला नहीं छोड़ सकता था...पर मेरे अच्छे खासे प्लान को ख़राब कर मुझे अकेला छोड़ कर तुम्हारे घर जा सकता है...और जब तुम एक दुसरे की बात बिना बोले समझ जाते हो...कब किसको क्या चाहिए..उसको तुम क्या कहोगी...इस अजीब सी chemistry को क्या नाम दोगी..." माहि ने सिया से तपाक से पुछा...

थोड़ी देर एक दुसरे पे छीटा-कसी चलती रही....मेरा तो मन कर रहा की काश ये सब सूनने से पहले मेरे कान क्यूँ नहीं ख़राब हो गए...पता नहीं सिया क्या सोच रही होगी...माहि गुस्सा होके होटल में जा कर अपने माँ-पाप को लेके होटल से चली गयी.....मेरा सर दर्द और गुस्से से फटा जा रहा था...

सिया ने मुझे संभाला.....देर तक मैं उसके कंधे पे सर रख कर रोता रहा....फिर खुद को संभाला...और सिया की आँखों में देखा....सोच रहा था..सिया lawn में क्या कर रही है.....तो सिया की आँखों में मुझे मेरा जवाब भी मिल गया...."नयी जगह है नींद नहीं आ रही थी तो सोचा थोडा लवण में घूम लेने से शायद अच्छा लगे"....फिर मेरी आँखों ने उस से माहि की तीखी बातों के लिए माफ़ी मांगी..और सिया ने आँखों से ही कहा.."चलो अंदर चले.."

"कुछ देर मैं येही रहना चाहता हूँ...तुम जाओ...जा कर सो जाओ.." मैंने सिया से कहा...वो कुछ नहीं बोली पर अंदर भी नहीं गयी वहीँ मेरे साथ खड़ी रही.....पता नहीं हम कब तक वहां खड़े रहे....पर सुबह होते ही सब को ले कर वापस अपने घर चल दिए....सिया को भी माँ-पापा ने साथ चलने को कहा...और जब तक कॉलेज शुरू नहीं होता..सिया हमारे घर ही रही....उसने मुझे संभाला और मैंने उसे....

कॉलेज के दुसरे साल हम लोग के subjects अलग-अलग हो गए थे...उसने Marketing और मैंने IT के विषय चुने थे....शुरू के कुछ दिनों तक हम अलग अलग अपने कमरों में ही पढते थे....पर पता नहीं क्यूँ पढाई में मन ही नहीं लगता था....और एक रात वो पहले की तरह मेरे कमरे के दरवाजे पे अपनी किताबे लिए खड़ी थी...फिर से हमारी देर रात तक की पढाई एक साथ शुरू हो गयी....वो अपने हॉस्टल से छुप के पीछे के रास्ते से हॉस्टल से बाहर आ जाती और मेरे कमरे में आ जाती....और सुबह होने से पहले उसी रास्ते से वापस अपने कमरे तक पहुँच जाती....सुहाना उसकी मदद करती थी....

अब तो भावेश भी नहीं हुआ करता था...तो कभी-कभी वो भावेश के बिस्तर पर भी सो जाती थी...मैं सुबह उसे सोते हुए निहारता रहता....सोते हुए बहुत ही मासूम और सुंदर लगती थी....हमारी पढाई फिर से अच्छी होने लगी....और हमारी दोस्ती भी वापस फिर से पहले जैसी हो गयी थी.....हाँ अब हम एक दुसरे tease नहीं किया करते थे....कभी जब मुझे माहि की याद आती और मैं उदासा हो जाता...तो वो मेरा होसला बढाती..."focus ...focus पियूष..पढाई पे focus करो....target placement है उस पर नज़र रखो.....past को भूल जाओ..."....और कभी वो अपने पापा को याद कर रोती तो मैं अपना कन्धा आगे बढ़ा देता...और कहता..."तुमको कुछ बनके दिखाना है...तुम्हारे पापा तुमको देख रहे है....तुमको अपना बिज़नस करना है.....अपनी माँ और भाई का ख्याल रखना है..." सच कहूँ तो इतने बड़े institute में हम एक दुसरे में परिवार नज़र आता था.....

धीरे-धीरे समय बीतने लगा.....हम अब बाहर भी घुमने जाते थे....कभी कभी हम दोनों अकेले होते थे..तो कभी सभी friends के साथ.....और एक दिन सिया को मैं भावेश से बात करते देखा....जो की मुझे अच्छा नहीं लगा...सिया से पुछा तो उसने बताया...भावेश ने उसे Date के लिए पुछा है....मैंने सिया का जवाब पुछा तो उसने बताया...हाँ एक Date में क्या हर्ज है ..बस एक Date ही तो है....और कुछ नहीं...भावेश को उसने साफ़ बता दिया की यह बस एक Date ही है..और आगे कुछ नहीं.....

जिस दिन वो दोनों Date पे गए मैं पूरा समय बेचैन सा रहा....हलाकि मुझे पता था...सिया भावेश के साथ कोई serious relationship नहीं रखना चाहएगी....मगर फिर भी पता नहीं क्यूँ.....शायद भावेश पर जो भरोसा नहीं था...

सिया ने बताया भावेश के साथ उसकी Date अच्छी थी...भावेश इतना बुरा नहीं है.....उसकी भावेश के साथ दोस्ती हो गयी है...भावेश ने उस से माफ़ी भी मांग ली है...और अब सब ठीक है....यह सब बातें मेरे दिलो-दिमाग में 2-4 दिन तक घुमती रही और कुछ दिनों बाद मैंने सिया से पूछ ही लिया...."अब तुम ही बस मेरी एक girlfriend रह गयी हो...तो क्या मेरी girlfriend मेरे साथ पहली date पे चलेगी.."...."पियूष...अब हम एक दुसरे तो tease नहीं करते..." सिया ने कहा

सिया का मायूस चेहरा देख कर मैं थोड़ी देर बाद सोच कर बोला "लेकिन अगर मैं tease नहीं कर रहा हूँ तो..मेरा मतलब सचमुच में मैं तुमको Date करना चाहता हूँ.....बस एक date ..."....सिया ने मेरी आखों में देखा और उत्सकता से पुछा.."Real Date ...मतलब बिलकुल फ़िल्मी".....फ़िल्मी शब्द सुन कर मैं डर गया...उसके लिए फ़िल्मी मतलब....कैसी Date ...मैं सब कुछ तरीके से करना चाहता था...जिस से सिया खुश हो जाए....इस में सुहाना ने मेरी मदद की...उसने सिया की पसंद-नापसंद मुझे बताई....उसकी सपनो की Date....कौन सी Date को वो फ़िल्मी Date कहती है..सब जान लिया सुहाना से...हलाकि सुहाना ने मुझे अच्छे से छेड़ा.....वो जानना चाहती थी आखिर मैं क्या करने वाला हूँ.....कहीं सिया को propose तो नहीं करने वाला...लड़कियां भी ना...और इन् लड़कियों के सपने....फूल...लाल heart shape के गुब्बारे...फिल्म....shopping ....उफ्फ्फ्फफ्फ़....

मेरी और सिया की पहली official Date वाले दिन

मैंने डेट के लिए सब कुछ तैयार कर रखा था...सब प्लान कर रखा था....कब क्या कैसे करना है...कैसे सिया को हेरान और surprise करना है...बिलकुल वैसे जैसा उसने सपनो में date की कल्पना की होगी...यकीं नहीं हो रहा था...की मैं एक सचमुच की date पे जा रहा हूँ अपनी उसी काल्पनिक girlfriend के साथ उसकी काल्पनिक date के बिलकुल मुताबिक....मुझे नहीं पता था आगे क्या होगा...वो कैसे इस सब को लेगी....अंदर ही अंदर डर लग रहा था.....क्या वो भी मेरे लिए ऐसे ही सोचती होगी.....मुझे मालुम है की वो मेरे सपनो की रानी नहीं है...जैसा मैंने सपनो में सोचा है वो वैसी नहीं है...बिलकुल अलग है..मेरी सोच से भी परे....मगर जैसी भी वो है मेरे लिए बिलकुल सही है...या फिर मेरी पहुँच से भी आगे है...क्यूंकि इतनी अच्छी लड़की...मेरे लिए....खेर अब जो होगा देखा जायेगा....उसकी हाँ होगी तो मैं उसे कभी अपने से अलग नहीं होने दूंगा....हमेशा खुश रखूँगा.....और न होगी तो भी हमारी दोस्ती में कोई फरक नहीं आयेगा....यह सब सोचते सोचते मैं तैयार हो कर हॉस्टल से बाहर आ ही रहा था.....की मैंने अपने सामने माहि को खड़ा पाया....

माहि मुझसे कुछ बात करना चाहती थी.....तो इसलिए मैं उसे अपने कमरे में ले आया....और उसने कमरे में आते ही कहा..."पियूष....मैं यहाँ तुमसे माफ़ी मांगने आई हूँ....उस दिन जो कुछ मैंने कहा...मुझे नहीं कहना चाहिए था...."

"हाँ जो कहा वो कहना नहीं चाहिए था...और जो किया वो.....माहि मुझे तुम पर बहुत गुस्सा आ रहा था....तुम और कुनाल...ना जाने कबसे....जब तुम उसकी थी तब फिर भी मैं समझ सकता हूँ....पर जब तुम मेरे साथ थी तब भी...तुमने कभी बताया भी नहीं की तुम कुनाल से मिलती हो.....सिया और मेरा रिश्ता तो दोस्ती का ही था....सभी जानते है..बस class में assignment partner ....और late night studies friends ...खेर अब इन् सब बातों का कोई मतलब नहीं रह गया है...."

"पियूष...कुनाल और जो मैंने किया...वो बिलकुल गलत था....मैं कुनाल की बातों में आ गयी थी.....वो मुझसे एक बार मिलना चाहता था...और जब उसे तुम्हारे और सिया के बारे में बताया मैंने तो उसने मुझे तुम दोनों के खिलाफ ना जाने क्या क्या कहा....और मैंने भी कई बार अपने college में लोगो को करते देखा है....अक्सर लोग दोस्ती के नाम पर अपनी शारीरिक भूख मिटाते है...तो मुझे लगा कुनाल सही बोल रहा है....और फिर हमारे बीच भी कोई ऐसा रिश्ता नहीं था...तो मैं बहक गयी...कुनाल ने मुझे बहकाया......मगर अब मैं और कुनाल भी अलग हो गए है....उसने मुझे भी धोखा दिया है...मैं बहुत शर्मिंदा हूँ...तुम मुझसे अभी भी गुस्सा हो....मैं दिल से माफ़ी मांगती हूँ ..तुम कहो तो सिया से भी माफ़ी मांग लुंगी..बस एक बार मुझे माफ़ करदो...मुझे एक मौका दो...जैसा तुम कहोगे वैसा ही करुँगी....बस एक बार मेरी ज़िन्दगी में वापस आ जाओ..."

"माहि....अब इस सब की कोई ज़रुरत नहीं है....मैं तुम से सचमुच बहुत गुस्सा था....अपने ऊपर पर भी गुस्सा था..की क्यूँ मैं तुमको..तुम्हारी ज़रूरतों को समझ नहीं पाया....क्यूँ तुमको खुश नहीं रख पाया...सच बहुत रोया मैं....फिर सिया ने मुझे संभाला....हमारे बीच पहले शायद दोस्ती के सिया कुछ नहीं था..या था भी तो हमें उसका पता नहीं था....but thanks to you ...उस रात के बाद हम दोस्ती से आगे निकल गए है....हम एक दुसरे को और बेहतर समझने लगे है....अब वो मेरी प्रेरणा है...और मैं उसका होसला...और अब मैं तुम पर गुस्सा नहीं हूँ...बल्कि तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ...उस रात के लिए भी और आज तुम यहाँ आई इसके लिए भी...क्यूंकि अगर ऐसा नहीं करती तो मैं सिया के लिए जो मेरे दिल है वो कभी समझ नहीं पाता...आज सिया और मेरी पहली date है...और आज मैं उसे मेरे जीवन में उसकी importance बताने वाला हूँ.." इतना बोलते ही मैं कमरे से बाहर निकल गया...और माहि वही खडी रह गयी...

हॉस्टल से निकलते वक़्त मेरे मन में सिया के लिए जो भी कुछ था..मैं उसे टटोलने लगा....हाँ माहि के साथ जो कुछ कुनाल ने किया मुझे उसका दुःख भी कहीं न कहीं हो रहा था...मगर सबसे ज्यादा मेरे और सिया के लिए ख़ुशी हो रही थी...अब मुझे मेरा और सिया का अनजाना सा  रिश्ता बिलकुल साफ़ साफ़ दिख रहा था....मैं सिया से शुरू से ही प्यार करता था..बस मुझे उसका एहसास नहीं था....उसकी तरफ से प्यार था या दोस्ती पता नहीं...पर मेरी तरफ से दोस्ती के साथ साथ उसके लिए फ़िक्र थी...भावेश को इसलिए मैं उस से दूर रखना चाहता था...क्यूंकि मैं खुद सिया के करीब रहना चाह्हता था..सबसे करीब..... अब सब कुछ समझ आ रहा था..की उस रात बस में क्या हो रहा था हमारे बीच..एक अनजान सी डोर थी...बस मेरे मन में माहि को खो देने का...और सिया की दोस्ती खो देने का डर था...पर सच कहूँ तो अब मुझे ऐसा लग रहा था की सिया के लिए अपने दिल में कबसे हो रही अपनी सारी भावनाओं को सिया से व्यक्त करने में मुझे कोई डर नहीं लगेगा.....आज नहीं तो कल मैं उसे अपने दिल की सभी भावनाए बता दूंगा....बस आज की date अच्छी जाए.....

Date मेरे प्लान के मुताबिक गयी..सिया को सब पसंद आया....वो बहुत खुश हुई....हम लोग सभी जगह गए जहाँ सिया जाना चाहती थी.....फिर तो जैसे हमारी आदत सी पड़ गयी........सिया के Date के ideas बदलते रहते थे......और धीरे धीरे filmi dates और practical होने लगे....lunch....dinner ...सड़क किनारे की चाट.... maggiee स्टाल ...बारिश में भीगने वाली dates.... अब हम अक्सर ऐसी dates पे जाते रहते और फिर एक दिन मैंने उसे propose कर दिया...जिसका जवाब सिया ने दो-चार दिन सोच समझ कर हाँ में दिया...

कॉलेज ख़त्म होने के बाद

हमारी placement हो गयी...हम अब नौकरी करने लगे...सिया अपने बिज़नस के लिए पैसे ज़मा कर रही थी.....और हमने एक दुसरे को अपनी सारी भावनाए बता दी थी....भविष्य में कब क्या क्या करने का प्लान है....नौकरी, बिज़नस, घर, शादी और बच्चे सब की विस्तार से चर्चा हो चुकी थी....और मैं तो बस माँ-पापा को सिया और मेरे बारे में बताने का मौका ढूंढ रहा था.....बस इंतज़ार कर रहा था की कब माँ मेरी शादी की बात छेड़े.....पर उनको भी पता नहीं क्या हो गया था.....अब उनको जैसे मेरी शादी की चिंता ही नहीं थी....या जैसे उन्होंने मेरी शादी की उम्मीद ही छोड़ दी थी...

फिर एक दिन हम सिया के घर गए.....मैं बहुत खुश हुआ...पर पता नहीं किसी ने मेरी ये ख़ुशी महसूस भी की या नहीं....सिया के घर मैं हर्ष से ज्यादा मेलजोल बढाने की कोशिश करने लगा.....सिया की माँ से भी तहजीब से बातें करता....सिया मुझे बाहर शहर घुमाने के बहाने घर से बाहर ले जाती...और हम यहाँ वहां घूम कर...कभी फिल्म देखने जाते.....हमने पहली बार kiss भी एक सिनेमा में की....सच मेरा तन बदन हिल गया था..झुनझुनाहट सी फ़ैल गयी उसके होठो की पहली छुहन से...करंट सा दौड़ गया तन-मन में........

ऐसे ही एक बार हम बाहर से आ रहे थे तो हमने सबको एक दुसरे का मुह मीठा करते हुए देखा...और जब हर्ष और पीहू ने हमें बताया...की अब से सिया पीहू की भाभी और मैं हर्ष का जीजू बन गया हूँ...जब हमें समझ में आया...की हमारे रिश्ते की बात पक्की हो गयी है...असल में सिया की माँ को सिया के लिए हमारे परिवार ने जो किया वो बहुत पसंद आया....उन्हें सिया के लिए हमारा परिवार ही ठीक लगा....जहाँ वो सबसे प्यार और सम्मान दोनों भरपूर पा सकेगी...और मेरे माँ-पापा तो कबसे मेरी शादी करना चाहते थे....और सिया को भी वो बेटी की तरह प्यार करते थे...उनके तो दोनों हाथो में लड्डू थे.....मैंने और सिया ने भी कुछ न बोलना ही ठीक समझा..जब सब कुछ अपने आप ही हो रहा था...तो फिर हमें ज्यादा कुछ करने की ज़रुरत भी नहीं थी...बस वो जैसा बोलते गए हम वैसे वैसे सर झुकाए सब मानते गए....फिर जल्द ही हमारी सगाई करा दी गयी....

और करीब एक साल बाद शादी हो गयी...आज सिया और मेरी पहली रात है.....सिया दुल्हन बनी मेरे कमरे में मेरा इंतज़ार कर रही है....मैं अंदर गया तो देखा वो घुघट ओडे सहमी सी बैठी है......ये पहली बार नहीं था की मैं और सिया एक कमरे में पूरी रात के लिए अकेले हो....पर पता नहीं क्यूँ एक अजीब सी हिचकिचात थी...हलाकि हमने इस रात के बारे खूब सारी बातें पहले भी की हुई थी....कैसे हम आगे बढेंगे...कब क्या कैसे करेंगे...सब कुछ...

कमरा फूलो की मोहक खुशबु से महक रहा था...मैं धीरे से सिया की ओर बढ़ा....धीरे से मैंने सिया का घुघट उठाया...उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या लग रही थी वो....जयादा makeup नहीं किया था फिर भी गज़ब ढा रही थी..बिलकुल सादी मगर मेरे दिल में असरदार चोट करने के खाफी था.....मैंने धीरे से उसके गाल को चूमा...फिर माथे को फिर उसके आँखों को.....बिलकुल वैसे ही जैसा वो चाहती थी....उसने मुझे बताया था...वो बिलकुल फ़िल्मी सुहागरात चाहती है.....मैंने धीरे से उसके सभी गहने एक-एक करके उतारे.....फिर धीरे-धीरे हमने एक दुसरे को चूमा....फिर मैंने उसके बदन को चूमना शुरू किया.... और धीरे-धीरे मैं जब उसी कमर वाले तिल पर पंहुचा...तो मुझे वो बस वाली बात याद आ गयी....तभी सिया बोली...."आज खूब अच्छे से देख लो इस तिल को...करीब से....उस दिन जो देख नहीं पाए थे..."

पता था मुझे सिया को मुझे तंग करने में बहुत मज़ा आता था.....पर आज रात.....आज तो उसे चुप रहना था.....बिलकुल चुप जैसा की हमने बात की थी....उसे बस शर्माना था बिलकुल फ़िल्मी दुल्हन की तरह ....हाँ मैंने वो बस में तिल और भावेश वाली बातें सिया को सब बता दी थी.....मैंने सिया का जवाब देना ठीक नहीं समझा....और उसे एक लम्बी kiss देने के लिए उसके चेहरे की ओर बढ़ा.....तभी सिया ने बिस्तर के side table पे रखा दूध का गिलास उठा कर पिया....फिर आधा ख़त्म कर मेरी ओर बढ़ा दिया.....और बोली..."यह लो Complain  Boy"...."complain boy ...अभी यह complain boy ....बताता है तुमको रुको..."....मैंने गिलास उसकी जगह रख कर सिया को एक ज़ोरदार लम्बी kiss दी.....और जैसे ही मैंने kiss ख़त्म की...सिया बोली...."Hell with the फ़िल्मी सुहागरात plan ....अब यह complain girl तुमको बताती है kiss कैसे देते है..."....और वो एक दम से उठ कर मेरे ऊपर चढ़ गयी और जोर से जंगली बिल्ली की तरह ज़पट पड़ी......और मेरी लाइफ की सबसे लम्बी और मजेदार kiss दी.....और हमारी वो पहली रात एक बोरिंग फ़िल्मी सुहागरात एक रामांचित और रोमानी रात में में बदल गयी....



और ऐसी ही कुछ रातों और kisses का सिलसिला हमारे honeymoon पे भी चला.....और एक बार हमने थोड़ी सी rum भी ली....वो अलग बात है उस दिन हमने क्या क्या किया दोनों को ही नहीं याद...honeymoon पे मैंने सिया और कई अलग-अलग रूप देखे....बिलकुल जंगली, रोमानी, संवेदनात्मक, जिद करती प्यारी सी बच्ची, डांट लगाती मास्टरनी, शर्माती हुई छुईमुई, एकदम बिंदास बेफिक्र तूफानी लड़की, फ़िल्मी हिरोइन की नखरे करती महबूबा, पति की जेब का बिलकुल ख्याल न रखने वाली shopping freak पागल पत्नी, पति की गलती निकालती और पति को बेवकूफ समझने वाली समझदार बीवी   ....Wild, bold and beautiful ....

और हम शादी के 2 साल बाद भी बहुत खुश है.....और आज जब हम सोचते है तो यकीं ही नहीं होता.....किसने सोचा था.....की सिया...मेरी हो जाएगी...इतनी intelligent लड़की...मेरी बीवी....यकीं ही नहीं होता....जिस लड़की को में सपनो में देखा करता था...उस से भी अच्छी लड़की मेरी ज़िन्दगी बन जाएगी.......किसने सोचा था वो लड़की जो प्यार व्यार में विश्वास नहीं रखती वो मुझ जैसे के प्यार में पड़ जाएगी......मन में आ रहे ख्यालों को भी हमने नहीं समझा....न मैंने न सिया ने....कभी एक दुसरे के प्रति अजीब से लगाव को समझा...हम समझ ही नहीं पाए...की हम भले ही एक दुसरे को आकर्षित नहीं लगते हो लेकिन हम दोनों की रूह एक दुसरे से कहीं न कहीं जुडी हुई थी....बिना किसी उपरी आकर्षण के या फिर अनजान आकर्षण वाला वो कैसा रिश्ता था हमारा...हाँ आज उस रिश्ते को नाम मिल गया है....मगर पहले तो हम हमारे अनजाने से रिश्ते से अनजान से ही थे...हम एक दुसरे में दोस्त ढूंढते रहे.....दोस्ती को देखते रहे और प्यार को नहीं देख पाए.....ना जाने ऐसे ही कितने अनजाना से रिश्ते ऐसे ही बिना कोई मुकाम पाए बीच में ही संसार के भवर में डूब जाते है.....एक अजीब सी डोर दो दिल के बीच जो बार बार उन्हें एक दुसरे की ओर खिचती है वो डोर संसार के उपरी दिखावटी आकर्षण के खेल के जालों में उलझ कर टूट जाती है.....

आज भी सिया और मैं एक दुसरे के दोस्त है.....एक दुसरे की बातों को बिन बोले समझ जाते है...एक दुसरे को खूब प्यार देते है...लेकिन इस प्यार से हमारी दोस्ती में कोई फरक नहीं आया है...आज भी हम एक दुसरे को तंग करते है....एक दुसरे को एकदम से चोंका देते है.....gifts और dates से लेकर रोमांटिक टाइम....और passionate love से अपने प्यार को भी बढ़ाते रहते है ........ आज भी हमारे बीच अनजाना सा रिश्ता कायम है....

THE END
~'~hn~'~

Note : This story is only a Fiction, not real story, It is only for inspirational.

4 comments:

Pallavi said...

अंत तक बंधे रखने में सक्षम एक daily सोप और फिल्मी कहानी जो सच्चाई के करीब लगी बढ़िया प्रस्तुति ....

Hema Nimbekar said...

@Pallavi...

Thanks for reading my story....i m glad you like it....

there are more stories in this blog...

check it out them too...and i am sure all stories are more near to reality...n probably you will like them too...

there is a link containing links of all my stories..
http://nimhem.blogspot.com/p/part-1.html

Simran said...

Wow!!
Lovely Story with lot's of sweet suspense :)

Thank you so much for sharing..
Keep Expressing

Hema Nimbekar said...

@Simran

Thank you so much sweetie...Its just for you....i hope you felt the love and enjoyed the story...

How u find my blog??

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