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Sunday, October 16, 2011

अनजाना सा रिश्ता (part 4)

अगले दिन कपिल ने बाहर से नाश्ता मंगवा लिया.....और सबको बुला कर नाश्ता करवाया.....मैंने सिया को ढूंढना चाहा पर नहीं मिली....सुहाना से पूछने पे पता चला की सिया अपने कमरे से बाहर ही नहीं आई....मैं नाश्ता ले कर उसके पास जाना चाहता था...पर पता नहीं किस वजह से नहीं जाने का फैसला किया...माहि को फ़ोन किया और उसे बताया की मुझे उसकी कितनी याद आ रही है..रास्ते भर वो मेरे खयालो में छाई रही...माहि का मूड भी बहुत अच्छा था...वो भी मुझे याद कर रही थी...पिछली कुछ मुलाकातें और हमारी प्यार भरी बातें...फिर उसने सिया के बारे में पुछा...की "वो भी खूब मस्ती कर रही होगी...हमेशा पढाई करने वाली लड़की...आज तो मज़े और मस्ती के मूड होगी..."

माहि की बातों से मैं कल की बात को भूलना चाहता था....पर उसने सिया का ज़िक्र कर सब किरकिरा कर दिया...खेर मैंने फिर विषय बदल कर उसके workshop के बारे में पुछा....करीब 10-15 मिनट और बात करने के बाद मैं खुद को ठीक महसूस कर रहा था....वापस सब के पास आया....तो सब हॉल में पहुँच चुके थे....music की तेज़ आवाज़..सब लोगो का शोर शराबा...soft और hard  music और drinks....सब लोग मस्ती कर रहे थे...मैंने देखा सुहाना और अर्जुन एक तरफ बैठे इश्क फरमा रहे थे....कोई भी देख के बता सकता था की रात भर दोनों ने एक दुसरे की बाँहों में बितायी होगी....

"सुहाना सिया कहाँ है?" मैंने न चाहते हुए भी उन दोनों को disturb कर दिया..
"सिया तो कमरे में ही है....रात भर उसके सर में दर्द था..सोयी ही नहीं पायी...उसे नयी जगह नींद नहीं आती...न खुद सोयी न मुझे सोने दिया...मैंने उसे बोला है जैसे ही उसे ठीक लगे बाहर आ जाये....देखो आती ही होगी.." सुहाना ने कहा और फिर अर्जुन को प्यार भरी नज़रों से देखने लगी.....
मैं सिया के कमरे की और जा ही रहा था की वो खुद सामने से आती हुई दिखी.....और आते ही बोली..."हे पियूष...लो मेरे बिना पार्टी शुरू भी हो गयी...सॉरी मुझे देर हो गयी..सर दर्द कर रहा था...रात को नींद नहीं आई....सर दर्द की गोली लेने के बाद ही सुबह ही थोड़ी नींद आई थी....अभी उठी तो ठीक लगा इसलिए आ गयी"....मैं उस से पूछना चाहता था...की वो रात भर क्यूँ नहीं सो पाई...नयी जगह होने की वजह से या फिर जो बस में हुआ उसकी वजह से....फिर सोचा शायद वो खुद ही बात करना चाहे...

मगर थोड़ी देर बाद तक भी उसने उस बारे में कोई बात नहीं की...वो बिलकुल पहले जैसे ही बात कर रही थी...जैसे हम पहले थे वैसे ही....जैसे जो हुआ उस से उसे कोई फरक नहीं पड़ा....जब उसे कोई फरक नहीं पड़ा तो मुझे भी सब भूल जाना चाहिए.....

"दोस्तों हम लोग अब एक खेल खेलने जा रहे है truth or dare....जैसा की सबको इसके rules पता ही है....पर हमने थोडा सा change किया है....इसमें जिसकी भी बारी आयेगी उसे truth और dare दोनों ही एक साथ करने पड़ेगे...no truth या dare ...बल्कि truth के साथ-साथ एक dare भी..." कपिल ने announce किया...
और खेल शुरू हो गया...एक एक कर सबकी बारी आने लगी...मुझे भी मज़ा आने लगा....सुहाना की बारी आई तो उसे अपने बारे में एक सच बताने को कहा गया....."मैं अर्जुन से बहुत बहुत प्यार करती हूँ....बेशक वो मुझे internet पे मिला था...पर अब वो मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा है और मैं अपना future उसी के साथ देखती हूँ..." और फिर उसे अर्जुन को kiss करने को कहा गया...तो उसने अर्जुन के गालो पे एक kiss दी....

फिर थोड़ी देर बाद सिया की बारी भी आ गयी....जिस से भावेश ने पुछा..."क्या तुम्हारा कोई boyfriend है....है तो कौन...और अगर नहीं है तो क्यूँ नहीं है...."...सच तो मैं सिया से पूछना चाहता था...कल के बारे में मगर सबके सामने नहीं अकेले में.."नहीं मेरा कोई boyfriend नहीं है...क्यूंकि आज तक मुझे किसी ने propose ही नहीं किया....किसी ने नहीं पुछा की क्या तुम मेरे साथ date पे चलोगी...." सिया का ये जवाब सुन कर पता नहीं क्यूँ मुझे विश्वास नहीं हुआ की वो सच बोल रही है....उसने मुझे तो ये बताया था की वो प्यार व्यार में विश्वास नहीं करती.....लेकिन कल जो हुआ उसके बाद तो जैसे जो उसने कहा वोही सच लग रहा था...शायद वो प्यार में बहुत विश्वास रखती हो..बस किसी ने उसकी खूबसूरती को देखा ही न हो....सिया को एक drink लेने को कहा गया...क्यूंकि सभी जानते थे की वो नहीं पीती थी....सिया ने एक छोटा सा पेग लगा कर dare भी पूरा किया...
और फिर मेरी बारी भी आ ही गयी...मुझसे सिया ने पुछा "क्या तुम कभी किसी लड़की के साथ...मेरा मतलब...अपनी किसी girlfriend के साथ ही....sexuaa......." "नहीं.....कभी नहीं..." सिया के आगे बोलने से पहले ही मैं जवाब दे दिया...सिया ने मुझसे ऐसा कुछ पुछा मुझे यकीं ही नहीं हो रहा था....शायद उसे चढ़ गयी थी...क्यूंकि वो दो चार पेग और लगा चुकी थी....और फिर मुझे भावेश ने dare दिया...."तुमको किसी लड़की के बदन पर एक तिल ढूँढना है और वहां उसे kiss करना है" भावेश किस तिल की तरफ इशारा कर रहा था मैं जानता था...बल्कि वहां सिर्फ वो और मैं ही जानते थे की वो किस लड़की के बदन पे और किस तिल की बात कर रहा है....एक पल तो लगा अभी उसे दो चार लगा दूं...पर फिर इधर उधर देखा और सुहाना की और बड़ा...उसका हाथ हाथो में लिया और उसके हाथो को चूम दिया...उसके हाथो पे एक तिल था....सुहाना "ओह्ह्ह....wow !!!! thanks ...हिहिहिहिहिही?"

खेल आगे बढ़ा और भावेश की बारी आई...उस से मैंने ही पुछा "भावेश हमने कभी तुम्हे लड़की के साथ नहीं देखा...मेरा मतलब सब ठीक तो है ना....तुम गे तो नहीं हो...just verifying..." आखिर इतनी मुश्किल से हाथ लगा बदला लेने का मौका मैं कैसे छोड़ सकता था....उसने भी तो तिल की बात से मुझे सबके सामने परेशान किया था...अब मेरी बारी थी उसके पसीने निकालने की...

"नहीं...नहीं...सब ठीक है...सब कुछ ठीक है...i am very much straight ....."सकपकाते हुए भावेश ने बोला....मुझे उसे इस तरह देख पता नहीं क्यूँ बहुत मज़ा आया.....फिर कपिल बोला.."अच्छा....तो फिर dare में तुमको किसी लड़की को propose करो....और अगर उसने हाँ बोल दिया तो किस भी करके दिखाओ"

भावेश इधर उधर देखने लगा...और अचानक सिया पर जाके उसकी नज़र टिक गयी...और वो आगे बढने लगा....मुझे लगा जैसे मैंने उसके लिए कुआ खोदा और मैं खुद उसी में गिर गया....पता नहीं क्यूँ उसे सिया की ओर बढते हुए देखना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था....

उसने धीरे से सिया का हाथ पकड़ा और पुछा.."सिया तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो.....क्या तुम मेरे साथ एक Date पे चलोगी....." मुझे लगा था भावेश नहीं कर पायेगा...पर उसने सच में बोल दिया...हाँ उसे पसीने बहुत आ रहे थे.....मैं मन ही मन भगवान से प्राथना करने लगा की सिया गलती से भी हाँ न बोल दे...
"हाँ....date पे....हाँ....चलो....मैं तो कबसे date पे जाना चाहती हूँ..." सिया ने यह कह कर सब लोगो की धड़कने बड़ा दी....सिया जो पहले से ही होश में नहीं थी.....वो भावेश को आगे बढने से भी नहीं रोकेगी...

भावेश सिया के और करीब आने लगा.....उसने सिया के चहरे के आगे अपना चेहरा रखा....दोनों हाथो से सिया के चेहरे को पकड़ा....मैं हडबडाते हुए सिया की ओर बढ़ा और उसका हाथ पकड़ के अपनी ओर खीच कर कहा..."भावेश...सिया होश में नहीं है...so please ...no kiss viss......"

"i hope अब कोई doubt नहीं है तुम्हारे मन में मुझे ले के..." भावेश ने मुझे घूरते हुए देखा और कहा....
"हाँ ठीक है.....मुझे माफ़ करदो...मुझे तुमसे ऐसे सवाल नहीं करना चाहिये था.." मुझे लगा मैं अभी भी उसी कुए में गोते खा रहा हूँ...

"चलो अब खेल को आगे बढ़ाते है" सुहाना बोली...और खेल फिर से शुरू हो गया....फिर अर्जुन की भी बारी आई उसके बाद खनक की और फिर कपिल की बारी आई...तो उस से पुछा गया.....की वो अपने पापा से नफरत क्यूँ करता है....और जवाब में कपिल रो दिया..."नफरत नहीं मैं उनसे बहुत प्यार करता हूँ..पर उनके पास मेरे लिए समय ही नहीं हमेशा business meetings....नया venture ....नया goal ..... profit ..loss ..मैं पापा से नहीं पैसो से नफरत करता हूँ तभी मैं इन् पैसो को खुद लूटता हूँ की कभी तो पापा के पैसो का पीछा छोड़ देंगे और उनको उनका प्यारा सा कपिल दिखेगा...एक दिन ऐसा ज़रूर होगा...उनको पैसो के ढेर में बैठा, उनके पैसो को लुटाता उनका बेटा ज़रूर नज़र आयेगा..." कपिल की बाते सुन सभी की आँखों में पानी आ गया..और जो लोग उसे show off करने वाला सोचते थे...उनको भी कपिल की अंतरात्मा नज़र आ गयी.....और dare में उसे अपने पापा को फ़ोन करने को कहा गया....उस से कहा गया की वो खुद अपने पापा को फ़ोन कर उनको अपने बर्थडे की याद दिलाये...कपिल फ़ोन करना नहीं चाहता था..पर सबके कहने पर उसने किया....और अपने पापा को अपने साथ बिताये सुन्हेरे पल याद कराये...उसके पापा ने उसे आशीर्वाद दिया....और वादा किया की अगले हफ्ते वो उसे मिलने ज़रूर आएंगे..

खेल ख़त्म हो गया...और सब फिर पार्टी का मज़ा लेने लगे.....फिर वापस सारे रास्ते सिया मेरे कंधे का सहारा लिया.....भावेश ने मुझसे बात करना छोड़ दिया....न तो रास्ते भर बात की और ना ही कॉलेज वापस आके हॉस्टल में भी.....और अगले दिन कमरे से अपना सारा सामान उठा के कपिल के कमरे में चला गया...मैं लगातार माफ़ी मांगता रहा.....सिया को पार्टी में क्या हुआ जैसे ही पता चला....वो मुझे thanks बोलने आई...

"thanks पियूष तुम अगर मुझे नहीं सँभालते तो पता नहीं क्या हो जाता...मैंने कभी नहीं पी...न ही मैं कभी पीती....खेल खेल में भी नहीं....वो तो बस में जो हुआ शायद उस वजह से...मुझे लगता है पियूष...हमको अब एक दुसरे से थोड़ी दूरी बनानी चाहिए...मैं तुम्हारे और माहि के रिश्ते के बीच नहीं आना चाहती.....मेरे लिए वैसे भी प्यार का कोई मतलब नहीं है.....और मैं हमारी दोस्ती भी नहीं खोना चाहती...इसलिए अब हम बस क्लास में ही मिला करेंगे..और ज्यादा से ज्यादा अलग अलग पढाई किया करेंगे...वैसे भी परीक्षाएं नजदीक आ रही है..." मुझे बोलने का मौका दिए बिना वोह बोले चली गयी....मैं उसके बिना पढने की सोच भी नहीं सकता...अपनी बात ख़त्म करते ही वो सुहाना के साथ library चली गयी...

परीक्षाएं ख़त्म होने के बाद

परीक्षाओं के बाद मैं अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था...मुझे घर से माँ और पापा को लेके माहि के प्लान किये हुए ट्रिप पे जो निकलना था...की अचानक...."पियूष....पियूष...." सुहाना आवाज़ लगाती हुई मेरे कमरे की तरफ दौड़ी चली आ रही थी..."पियूष...सिया....जल्दी चलो..." मैं बिना सोचे समझे उसके साथ चल दिया...girls hostel में लडको का आना बिल्कुल मना था.....सुहाना के जोर देने पे चौकीदार मान गया...और मुझे सुहाना के साथ अंदर जाने दिया..मैं पहली बार सिया के कमरे के अंदर जा रहा था......

"क्या हुआ सिया को ?...." मैंने सुहाना से रास्ते में ही पुछा...तो उसने बताया..सिया के घर से फ़ोन आया था...उसके पापा का accident हो गया है....और उनकी हालत बहुत ख़राब है....सिया बेहोश हो गयी है...अब इस हालत में हॉस्टल वाले उसे घर नहीं जाने देंगे...तो मुझे और सुहाना को सिया के साथ जाना होगा.... "सिया के  पापा.....सिया ने कभी मुझे अपने पापा के बारे में नहीं बताया...हमेशा माँ और अपने भाइयों के बारे में भी बात किया करती थी..." मैं मन ही मन सोच ही रहा था...की सुहाना बोली.."सिया तो अपने पापा से बहुत प्यार करती थी....पापा की लाडली थी वो...पर जब उसने इस कॉलेज में दाखिला लिया तबसे उसकी और उसके पापा की बोलचाल बंद थी...उसके पापा उसे हॉस्टल में रहने से मना करते थे...वो उसे घरके आस पास ही पढने को बोलते थे..पर सिया को तो अपना बिज़नस खोलना है...इसलिए यह डिग्री उसके लिए बहुत ज़रूरी है....उसके पापा की जिद से भी ज़रूरी...चाहे उसे उसके प्यारे पापा और घर वालो से दूर रह कर ही पढना पड़े....वो सबके लिए तैयार थी....उसने सोचा था...वो जब कुछ बन के , अपना बिज़नस खोलने के बाद..कुछ कर दिखने के बाद पापा के पास जाएगी तो उसके पापा..उस पर गर्व करेंगे...उसे प्यार से गले लगा लेंगे...सब नाराज़गी भूल जायेंगे.." सुहाना जो कुछ बोल रही मैं उसे समझने की कोशिश कर रहा था....

थोड़ी देर बाद सिया को होश आ गया था...पर उसने किसी से भी एक शब्द भी नहीं बोला...घर से फ़ोन आया तो मैंने उनको बता दिया मैं कुछ दिनों बाद ही आ पाउँगा...और माहि का फ़ोन आया तो उस को भी ट्रिप को कुछ दिन आगे बढाने को कहा....

अगले दिन मैं सुहाना और सिया को लेके सिया के घर की और चल दिया...सुहाना ने अर्जुन से बोल के ट्रेन की tickets करवा ली थी...


to be continue....
~'~hn~'~

Note : This story is only a Fiction, not real story, It is only for inspirational.

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