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Thursday, December 6, 2012

गुस्ताख दिल

रोका बहुत अपने गुस्ताख दिल को,
फिर भी तुम्हे देखते ही ये रुका।

कभी न झुखने दिया किसी के आगे जिसे,
वो जिद्दी घमंडी खुद तेरे आगे ही झुका।

समझाया भी बहुत इस नासमझ को,
पर तेरे इशारे न जाने कैसे पलभर में समझा।

सिखाया पढाया सब दुनियादारी का सबक इसे,
प्यार का पाठ पढ़ सब दिया इसने ऐसे भुला।

~'~hn~'~

Tuesday, November 27, 2012

दिल का गुलाम

रोज़ होती हैं धूप से बातें,
छांव की भी खेर खबर रखते हैं हम।

खोजतें हैं हर जगह दिल का खोया चैन,
सुख को भी दुआओं में माँगा करते है हम।

ग़मों के हजारों कडवे घूँट पीते है ख़ुशी से,
अपनी छोटी सी छोटी खुशियों का भी हिसाब रखते हैं हम।

दुश्मन तो कोई भी नहीं हैं हमारा जानतें हैं,
दोस्तों की भी गिनती बेहिसाब रखते हैं हम।

दिल के कमरे में असीम दुनिया बसाई रखती है,
दिमाग की भी आज़ाद उड़ान की डोर भी नहीं बाधते हैं हम।

कोई कहता है हमें बेफिक्र मनमौजी मतवाला,
पर खुद को किस्मत का कंगाल और दिल का गुलाम मानते हैं हम।

~'~hn~'~

Thursday, October 18, 2012

मगर

ये कविता एक ऐसी महिला की है जो अपनी शादी को टूटते देख चुकी है। लव मैरिज को ले के जो सुन्दर सुन्हेंरे सपने संजोय थे कभी वो सभी शादी के कुछ सालों बाद ही खाख होते देखे है उसने। फिर कुछ और साल अपने बेरहम पति की बेरहमी सहन की है उसने। इतना सब सहा तो बस अपनी शादी को बचाने के लिए। अपने बच्चों के लिए। अपने पुराने प्रेमी के लिए। दुनिया के लिए। अपने प्यार के लिए। अपनी प्यार भरी यादों के लिए। और अब वो अपनी शादी जो की कबकी मर चुकी है उसकी लाश को आखरी विदाई दे रही है उसकी आँख फिर भी नम है मगर उसके पति के मुख पर एक शीकन भी नहीं ऐसा क्यूँ। क्या सच में वो उसे भूल गया है। उसके प्यार को भूल गया है। उसके दिल में कुछ सवाल है पूछना चाहती है अपने पति से। उसी के इन् सवालों को मैंने अपनी कविता में उतारा है तो पेश है वो दर्द भरी कविता।






जो दिल दिया था तुम्हे वो तो तुमने वापस दे दिया,
मगर वो दिन जो साथ थे बिताए कैसे वापस दोगे ।






चाँदनी रातों के हसीन सपने तो तुम साथ ले गए,
मगर उन रातों की प्यार भरे रंगीन अफ़साने कैसे ले जाओगे ।





मेरे लिए खुद के बनाए हजारों तारीफों के पुल तो तोड़ दिए,
मगर यादों में बसे वो सुहाग की सेज के महकते फूल कैसे तोड़ोगे ।






बहकते क़दमों की वो छाप धड़कते दिल के ज़ज्बात तो तुम भुल गए,
मगर सुलगती रात में हमारे प्यार की वो सौगात को कैसे भुलाओगे ।






ज़माने भर के सामने दिए सात वचन तो तुम कागज़ पे सिहायी कर तोड़ गए,
मगर मेरे दिल की अदालत में लिए हजारों वादों का समन कैसे तोड़ोगे ।






पत्नी होने और तुमको पति कहने का हक तो तुम मुझसे ले गए,
मगर बच्चों से उनके पिता होने और पापा कहने का हक कैसे लेजाओगे ।
~'~hn~'~

Friday, February 17, 2012

Those Wonder years

Remembering Those Wonder Years
When we never need a reason for Cheers

Brother used to hide his pain and tears
Sister had her own soft pink teddy bears

We love the Sky full of twinkling stars
Wondered too far yet sparkle for hours

We enjoyed the every drop of drizzling or heavy rain
Wondered how clouds hold so many buckets of water to drain

We usually saw mother working at home
Wondered what dad do daily in his office dome

We used to take money and shop things from market
Wondered from where dad got so much money in his pocket

Without analyzing futuristic aspects further
We just want to be like our mother and father

Remembering Those Years of Puberty
We never wanted to missed any Liberty

Curiosity to know more what sex is all about
Wondered from where babies are came out

So many mysteries to be solved about ourselves
Wondered why we admired our teacher's bookshelves

Now we know things better though no such fun
No Wonders those Wonder years wouldn't return

But still we have memories of those
Glad we had that journey on our toes
~'~hn~'~

Monday, January 30, 2012

पहला पड़ाव

Here I am for celebrating the my special day ....well before I will start I first have to wish my Dearest Mom 



"A Great Birthday...
Happy Birthday Mom
Love you so  much
Muhaaa..
you are such special person
thanks for everything"






Today, 30th January is first Anniversary of the day I woke up and decided to start this blog for sharing my "Few Magical Words"...despite of knowing nothing about writing and blogging...I just had some writings of my childhood to share here...I never thought to start writing again...this time more mature and more precisely .......through out the year I did have loads of experience in being a stupid, emotional fool, negative thinker, childish and sometimes into my own shell like a shy baby too(when I was unseen here or nowhere actually)...

I never imagined it would lead my life and my thoughts being enriched and my world being expanded so greatly. I shudder to think of all the wonderful people with their amazing blog I never would have met and the experiences I would have missed out on if I had, oh, gone back to sleep on the day year ago instead of spending few hours searching how to start a blog...how to write in "Hindi Script" and such...


To all those who have read, commented, supported and hang out with me this long, I thank you deeply . I hope you always find this blog interesting some or other way...I hope to be continue this journey long....and long with all of you people...looking up for newbies...



Now I would like to present same feelings of mine in my poem...."पहला पड़ाव"




साल भर पहले की
है बात
पर लगता है कल ही हुई
थी शुरुआत

थी अकेली बस
कुछ शब्द लिए जादुई
शब्दों के जाल बुने
खूब महफिले सजाई








लम्बा सुहाना सफ़र
पहला पड़ाव
कितनो से सलाम नमस्ते
कितनो से हुआ जुडाव

हर बार नया कुछ
रचा यहाँ
कभी कविता तो
कभी किस्से कहानी यहाँ




दिल की बात
दिल तक पहुंची
कभी समीक्षा कभी कटाक्ष
बात समूची

सोच से परे
जब कुछ रचना बनती
तब शाबाशी सी
दोस्तों की वाह वाही मिलती




आज दिल उलास से
है भरपूर
आप सभी को करती हूँ
आभार मैं ज़रूर



 आगे भी यूँही
उत्साह देते रहना
कोई भूलचूक हुई हो
तो माफ़ करना

यह सफ़र
जारी रहे यूँही
आप जैसे
हमसफ़र रहे यूँही


हमारा छोटा परिवार
और बढे और फले-फुले
साथ जुड़ते रहे साथ
कोई किस्सी को न भूले
~'~hn~'~



Some Special Messages by Friends

From Harshal Patel:
Your blog with poem, Stories, your thoughts all are amazing. As per the blog name suggest your all written articles have magical word....But the word few show that your goodness but your always write Much Magical words.......Always keep writing blog.......

From Irfan Uddin:
Dear Hema, Happy blog anniversary!! So exciting and you have came a long way!! I love reading your posts specially the fiction stories by you. Every blog has two aspects quality and quantity and personally I feel that you always look for quality, so sometimes there is a long gap between two consecutive posts (thats what I feel)....I feel so bless to be able to connect with you. Have a lovely anniversary day.....God Bless

From Melissa Tandoc:
In truth, I haven't been here for a very long time to share your blog posts, most of which are written in your own script and language. For the ones, I spent moments with, I am very grateful. All the best to you ! May you be blessed in every way :)

Friday, January 27, 2012

ज़रा गौर फ़रमाए (5)

इतना दर्द कहाँ से लाती हूँ
सोचो की सहने की हिम्मत कहाँ से लाती हूँ ।
यह दर्द तो सहन हो भी जाता है मगर
उनकी बेरुखी को पीने का जिगर कहाँ से लाती हूँ ।।
~'~hn~'~

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दिल से दिल को राह होती है 
तेरे दिल की हर आह से मेरी बात होती है ।
दिल की बातें तो अब सरे आम होती है
दिल के बाज़ार में मेरी आहें यूँ ही नीलाम होती है ।।
~'~hn~'~

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चल यार यहाँ मुशायेरा लगा लेते है
शेरो शायरी से दिल नहीं भरता अब
अपनी आप बीती सुना देते है
तू एक शेर लिख मैं शायरी लिख देती हूँ
तू एक इशारा कर मैं दर्द-ए-दिल लिख देती हूँ
 ~'~hn~'~

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मुद्दत हो गयी मेले देखे
अब तो खुद से ही हम बोर हो जाते हैं ।
काफिले गुज़र जाते है नज़दीक से तो भी
अकेले खड़े निहारते हम रह जाते हैं ।।
रह गुज़र कोई भटकता सा दो आंसूं साथ बहा लेता है ।
वरना हम तो यादों की लाश पे ही अकेले मातम बना लेते हैं ।।
~'~hn~'~

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मेरा दिल, रातो की नींद, दिन का चैन,
सब कुछ तो ले ही लिया है
पर तुमको प्यार करने का हक़ ना लो ।
दिल को तोड़ कर वापस जोड़ नहीं सकते अगर
तो कम से कम हमें टूटके मुहब्बत तो करने दो ।।
~'~hn~'~

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इस बेरहम तन्हाई का डर और कम्भख्त जुदाई का दर्द
तुम क्या जानो बेदर्दी ।
पहली बार तो खफा नहीं हुए थे हम
तुमने ही मानाने की रसम बदल दी ।।
~'~hn~'~

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यूँ दूर मत रहो कुछ करीब आने की पहल डालो ।
दूर रहने की बहुत बुरी आदत अपनी बदल डालो ।।
~'~hn~'~

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कांच के टुकड़ों पर भरोसा तो कर लिया
कभी अपनी उँगलियों पे भरोसा कर लिया होता ।
हम तो चलो गेर ही सही
पर कभी अपनों का कहा भी मान लिया होता ।।
~'~hn~'~

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