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Saturday, March 26, 2011

संस्कार

देव एक middle class का सीधा-साधा 17 साल का लड़का था। उसके पापा एक सरकारी दफ्तर में छोटे से कर्मचारी थे। उसके घर की माली हालत ठीक न होने के कारण देव कभी भी अपना मनचाहा कोई भी सामान नहीं खरीद पाता था। उसका भी मन करता था कि वो दुसरे लड़को की तरह अच्छे-अच्छे नए-नए कपड़े पहने जो की नए ज़माने के फैशन के हो। वो भी दुसरे लड़को की तरह खूब सारी मस्ती करना चाहता था। उसे भी सुंदर-सुंदर नयी-नयी चीज़ें चाहिए थी। 

एक बड़ी-सी सड़क के किनारे गुमसुम सा सोच में डूबा हुआ देव..मन ही मन अपनी किस्मत को कोस रहा था। तभी उसका ध्यान एक तेज आती bike की ओर गया। bike बहुत जोर से आती हुई देव के पास से गुजरी एक बार तो देव भी डर गया था कि यह क्या हुआ। फिर जब bike चली गयी तो फिर सोचने लगा। मेरे पास भी bike होती तो मैं भी थोडा-सा स्टाइल में रहता। फिल्मी हीरो की तरह bike चलाता। वो मन ही मन अपने आपको bike चलाते हुए देखने लगा। फिर दो मिनट के बाद फिर उसे वही bike की आवाज़ आई जो की इस बार दूसरी तरफ से आ रही थी। इस बार bike की speed कम थी। bike पे बैठा लड़का लगभग देव की उम्र का ही दिख रहा था। उसने नए फिल्मी हीरो की तरह designer shirt और jeans पहनी हुई थी। उसने इस शाम के समय भी काला चश्मा पहना हुआ था। देव को पता था उस काले चश्मे को बड़े पैसे वाले लोग Goggles या फिर sunglasses कहते है। मगर देव के दोस्त तो उसे धूप का चश्मा ही कहते थे। देव यह भी जनता था कि उस लड़के ने वो धूप का चश्मा स्टाइल मारने के लिए ही पहना हुआ है वरना यहाँ धूप जैसा कोई मौसम नहीं था। शाम हो चुकी थी। वो bike वाला लड़का एक नयी फिल्म का गाना गुनगुनाता bike चला रहा था। बीच-बीच में सीटियाँ भी मार रहा था। वो bike फिर से एक बार मूड कर वापस आई। इस बार वो लड़का लहरा-लहरा कर bike चला रहा था। देव उसी को ध्यान से देखने लगा। bike फिर से दूर गायब हो गयी।

फिर अचानक देव को किसी कुत्ते की आवाज़ आई। उसने देखा कि ठीक उसके सामने कुछ ही दूरी पर एक कुत्तिया सड़क के उस और मुह करके भौंक रही थी। देव ने उस ओर देखा जहाँ वो मुह करके भौंक रही थी तो देव की नज़र सड़क की उस ओर खड़े छोटे से पिल्ले(puppy) पे पड़ी जो कि सड़क पार करने से डर रहा था। शायद उसकी माँ उसे इस पार आने को कह रही थी। गाडियाँ भी सड़क पे आ जा रही थी जिसकी वजह से वो पिल्ला डर रहा था। देव ने सोचा क्यों न उस पिल्ले को उसकी माँ के पास पंहुचा दूँ। तो देव सड़क पार करने लगा। तभी उसने देखा सड़क clear होते ही हिम्मत करके वो पिल्ला कुछ आगे बढ़ा और सड़क पार करने लगा। तभी देव ने देखा कि वो bike वाला लड़का फिर से तेजी से bike ले कर आ रहा है। देव उस पिल्ले की ओर भागा। bike की speed बहुत तेज थी। देव ने bike की speed की परवा किए बिना पिल्ले को बचा लिया। पिल्ला उसके हाथो में ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था। उसके मिमयाने की आवाज़ से साफ़ समझ आ रहा था कि वो कितना डर गया था। देव ने उसके धड़कते दिल को महसूस किया जो जोरो से धड़क रहा था। कु कु कु कर वो अपनी माँ को बुला रहा था। देव ने उस पिल्ले को उसकी माँ के पास पंहुचा दिया जो कि अपने बच्चे के लिए बिलख सी रही थी।

तभी देव को तालियों की आवाज़ आई। उसने देखा सड़क के दोनों किनारे कुछ लोग खड़े हो कर उसके लिए तालियाँ बजा रहे थे। सब देव की तारीफ किए जा रहे थे और साथ ही साथ उस bike वाले लड़के को बुरा भला कह रहे थे। देव फिर अपनी रहा पे चल दिया और फिर से सोचने लगा कि उस bike वाले लड़के से अच्छा तो मैं हूँ। वो चाहे बड़े घर का लड़का हो पर देव तो बहुत अच्छा लड़का है। उसने एक जीव की जान बचायी है। वो bike वाला लड़का अपनी जवानी के नशे में चूर है और उस नशे में वो क्या कर रहा है उसे भी नहीं पता। आज वो एक जीव की जान ले लेता। और जबकि देव भी जवान है पर उसे पता है कि वो क्या कर रहा है। उसने आज एक बहुत अच्छा काम किया है। उसके पास पैसा न हो पर अच्छे संस्कार है। उसके पास अच्छा पहनने को, अच्छा खाने को, स्टाइल मारने को भले ही कुछ नहीं पर उसके पास अच्छी सोच, दुसरो के लिए भलाई, बहादुरी,तेज दिमाग और एक बड़ा अच्छा दिल है। वो चाहे फिल्मी हीरो की तरह दिखता न हो पर असल ज़िन्दगी में वो एक हीरो ही है। असली हीरो। जिसने अपनी बहादुरी से एक नन्हे से पिल्ले की जान बचायी है। तभी देव ने फ़ैसला किया आगे से वो कभी अपने को कम नहीं समझेगा और न ही कभी ख़ुद की तुलना उन लड़कों से करेगा।


THE END
~'~hn~'~

Note : यह कहानी मैंने उन तेज bike चलने वालो को एक सीख देने के लिए लिखी थी कि ज़रा सी मस्ती, ज़रा सा स्टाइल, लड़कियों को दिखाने या पटाने  के चक्कर में वो न जाने कितने मासूम जीवों की जिंदगियां सड़क दूर-घटनाओं में ख़त्म कर देते है। और देव जैसे लोग सचमूच के देवता बन कर जीवों की जिंदगियां बचाते है। सच में देव उस puppy और उसकी माँ के लिए एक देवता, एक मसीहा ही तो बन कर आया था। या फिर देवता ने अपना दूत बना कर उसे वहां भेजा था।

Note : एक सीख और मिलती है इस कहानी से की हमें कभी भी अपनी सभ्यता अपने संस्कारों को नही भूलना चाहिए। दुसरे लोगो की हाव भावः देख कर या उनके चाल ढाल देख कर हमें कभी बिना सोचे समझे उन जैसी नक़ल नही करनी चाहिए। दुसरो की सही आदतों को अपनाना चाहिए फैशन और स्टाइल के नाम पर कुछ भी ऐसे ही नही अपनाना चाहिए।  हमेशा यह याद रखना चाहिए ऊपरी पहनावे और दिखावटी चाल से किसी भी इंसान के अंदर नहीं  झाँका जा सकता ,यह नहीं बताया जा सकता  कि उसके दिल में क्या है , उसकी सभ्यता कैसी है ,उसके विचार कैसे है और उसके संस्कार कैसे है.। 

~'~hn~'~

Note : This story is only a Fiction, not real story, It is only for inspirational.

12 comments:

Simran said...

Di tussi great ho ! :)
Loved it and learned also ..
Yeah we should always have a self confident that we are better than others and should always adopt something from others that help us or improves us anyway, we should never forget our policies ..

Great post and a good lesson for those fast bike riders who don't cares how blunt mistakes they are making !

Hema Nimbekar said...

thank you simran...:):)

some unspoken words said...

wow hema.thats great. u r very right we must remember our culture and the most important thing is our human ethics.. keep writing loved it soo much

Shahin said...

Ya we should be proud pf our culture & originality...
Keep up your good work Hema...

Hema Nimbekar said...

@some unspoken words
thank you..yeah human ethics are most important....and in today's world it become more important not to lost the way...and not to indulged in tempting misguided things..like showoff..

Hema Nimbekar said...

@shahin
It is not wrong to change....but yeah remember and proud of our culture and originality...

one must change...can add new good things to culture...neglect or reject false, rigid and bad things from own culture...

one must first think the consequence of a particular change...change should take as positive...

Alcina said...

Wah..bohot hi pyaari kahani thi..aur apne ek bohot acha sandesh diya sabko..
aise hi kahaniya likhti rehna hemu di :)

Hema Nimbekar said...

thank you snehu...:):)

Motifs said...

sorry for taking so long..was a little busy..and I take time to read Hindi,ashamed to say this,but out of practice. You are a born story teller...is story of yours is a must for everyone..we all can learn from this.

Hema Nimbekar said...

@Alpana

Di...its ok...u don't hv to be ashamed....we all are out of practice..reading, writing and listening our own National/Local language..."Hindi".....

the main reason to write my post in Hindi is that I don't want to forget this beautiful language...as after my matric exams I hardly use to write or read Hindi language...though I already write some poems and stories earlier(8th std.)...

After so many years...once i found my diary i used to write...revisiting it again and again...i decided to share those poems ad write few more....I tried one poem(Hindi)...I felt so good to write something in hindi....
then its become usual way to express my feeling...and start sharing it on some site, facebook...and now on blog....

your words of appreciations meas a lot to me...thanks di...

Mohinee said...

HI Hema! First time reading you. But when I first saw your blog, I felt, I should come here is leisure to read without time of tension.

Stories like this are my weakness. And while reading it, I am a little kid, seriously learn everything.

I loved it so much, that can't tell you. Real style of life is that what Dev have.

And I am happy, girl of your age is writing on such a nice topic, instead of style and fashion.

Love. My best wishes for your best writing.

Hema Nimbekar said...

@Mohinee

di, thanks for reading..I m so overwhelmed to know that u liked it so much...

I m kid too...I read same a like stories often...ad learned every time new value...new view...new thought...

instead of writing style ad fashion..I love to write these type of stories...stories with some message or some new thing to learn...because without style and fashion we still can live...but without these learning and values development we can;t think of personal growth...that's a true persona of reader's or writer's life..

keep visiting...

How u find my blog??

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